चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के साथ-साथ कला के प्रति जुनून को जीवंत रखने वाली जयपुर की स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं कलाकार डॉ. विनीता पाटनी ने केरल म्यूरल शैली में भगवान गणेश की एक भव्य पेंटिंग तैयार की है। 5 फीट चौड़ी और 4 फीट लंबी कलाकृति को ऐक्रेलिक रंगों से तैयार किया है। पेंटिंग में इस्तेमाल किए गए चटख रंग और केरल म्यूरल शैली की बारीकियां इसे विशेष आकर्षण प्रदान करती हैं। डॉ. विनीता पाटनी चिकित्सा शिक्षा के दौरान स्टेट टॉपर रही हैं और उन्हें कई गोल्ड मेडल भी प्राप्त हुए हैं। चिकित्सा के साथ कला के प्रति उनका लगाव बचपन से ही रहा है। उन्होंने तीन वर्ष की उम्र से ही पेंटिंग बनाना शुरू कर दिया था। उनकी कला का मुख्य माध्यम ऑयल ऑन कैनवास रहा है, लेकिन विभिन्न कला शैलियों को सीखने और प्रयोग करने की उनकी रुचि लगातार बनी रही। केरल की यात्रा के दौरान उन्होंने वहां की पारंपरिक केरल म्यूरल कला को करीब से जाना। इस शैली की रंगों, आकृतियों और धार्मिक विषयों की विशिष्ट प्रस्तुति से वह इतनी प्रभावित हुईं कि वापस लौटने के बाद उन्होंने इसी शैली में कई चित्र तैयार किए। इसी श्रृंखला में भगवान गणेश की पेंटिंग भी शामिल है। इसमें गणेशजी को केरल म्यूरल शैली की पारंपरिक सौंदर्य दृष्टि के अनुरूप उकेरा गया है। चमकीले और जीवंत रंगों का प्रयोग पेंटिंग को आध्यात्मिकता के साथ-साथ दृश्यात्मक भव्यता भी प्रदान करता है।
डॉ. विनीता की इस कलाकृति की विशेषता केवल इसकी कलात्मक प्रस्तुति ही नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपे आध्यात्मिक अर्थ भी हैं। पेंटिंग में भगवान गणेश के चार हाथों को उनकी दिव्य सर्वव्यापकता, सर्वशक्तिमत्ता, सर्वज्ञता तथा मन, बुद्धि, अहंकार और चेतना जैसे आंतरिक सूक्ष्म तत्वों पर नियंत्रण के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। गणेशजी के हाथों में धारण किए गए फरसा, पाश, मोदक और मुद्रा का भी प्रतीकात्मक महत्व है। फरसा सांसारिक मोह और आसक्ति को काटने तथा नकारात्मक इच्छाओं और आध्यात्मिक मार्ग की बाधाओं को दूर करने का संदेश देता है। पाश नकारात्मक विचारों और भ्रम को नियंत्रित करने तथा व्यक्ति को सत्य के करीब लाने की शक्ति का प्रतीक माना गया है। वहीं आशीर्वाद मुद्रा भय से मुक्ति, सुरक्षा और ईश्वरीय कृपा का संदेश देती है। गणेशजी के हाथ में रखा मोदक आध्यात्मिक साधना से प्राप्त होने वाले आंतरिक आनंद और परम सुख का प्रतीक माना गया है। इस तरह पेंटिंग में रंगों और आकृतियों के साथ-साथ भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के प्रतीकों को भी स्थान दिया गया है।
कला और चिकित्सा का संगम, डॉ. विनीता पाटनी ने बनाई केरल म्यूरल शैली में गणेशजी की भव्य पेंटिंग
डॉ. विनीता पाटनी के लिए पेंटिंग केवल शौक नहीं है, बल्कि चिकित्सा जैसे चुनौतीपूर्ण पेशे के बीच तनाव दूर करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। उनका मानना है कि कला उन्हें मानसिक सुकून देती है और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में आने वाले भावनात्मक दबावों से निपटने के लिए एक स्वस्थ एवं रचनात्मक रास्ता प्रदान करती है। एक चिकित्सक के रूप में जहां उन्हें रोजाना मरीजों और उनके परिवारों की गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, वहीं कैनवास उनके लिए रचनात्मक अभिव्यक्ति का स्थान बन जाता है। चिकित्सा की तार्किक और तकनीकी दुनिया के साथ चित्रकला की कल्पनाशील दुनिया का यह मेल उनके व्यक्तित्व को अलग पहचान देता है। डॉ. विनीता पाटनी का परिवार भी चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ा है। उनके पति डॉ. तरुण पाटनी बाल रोग विशेषज्ञ हैं। उनके बेटे डॉ. तनमय प्लास्टिक सर्जन हैं, जबकि बेटी डॉ. विनम्रता इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट हैं। ऐसे चिकित्सा-प्रधान परिवार में डॉ. विनीता की कला के प्रति सक्रियता एक अलग रचनात्मक आयाम जोड़ती है। उनकी पेंटिंग्स विभिन्न कला प्रदर्शनियों में प्रदर्शित हो चुकी हैं।
डॉ. विनीता केवल चित्रकार ही नहीं, बल्कि लेखिका और कवयित्री भी हैं। उनके लेख नियमित रूप से पत्र-पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहे हैं। चित्रकला के अलावा वह मैक्रेमे, लिप्पन आर्ट, पेपर-माशे और ब्लू पॉटरी जैसी विभिन्न कला विधाओं में भी रुचि रखती हैं। उनकी रचनात्मक यात्रा इस बात का उदाहरण है कि पेशेवर जीवन की व्यस्तता के बावजूद व्यक्ति अपने भीतर के कलाकार को जीवित रख सकता है। चिकित्सा विज्ञान जहां मानव शरीर और जीवन को समझने का प्रयास करता है, वहीं कला मनुष्य की भावनाओं, कल्पना और आध्यात्मिक चेतना को अभिव्यक्ति देती है। डॉ. विनीता पाटनी का व्यक्तित्व इन दोनों क्षेत्रों के इसी खूबसूरत संगम को सामने लाता है।

